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Ghanshyam Tiwari

राजनीतिक जीवन

घनश्याम तिवाड़ी(Ghanshyam Tiwari) छात्र जीवन से ही राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे। देश और समाज के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार से मिली। आजादी के बाद 1948 में जब संघ को प्रतिबंधित किया गया था तब उनके ताऊजी ने विरोध किया और जेल गए। राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में जन्मे और पले-बढ़े घनश्याम तिवाड़ी(Ghanshyam Tiwari) को सीकर के श्री कल्याण संस्कृत महाविद्यालय में छात्र हितैषिणी सभा का महामंत्री बनाया गया। 1968 से 1970 तक तिवाड़ी इस सभा के महामंत्री रहे और छात्र हित में कार्य करते रहे। यहीं से उन्हें राजनीतिक सामाजिक सेवा की इच्छा को बल मिला। तिवाड़ी ने श्री कल्याण संस्कृत महाविद्यालय से ही स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जयपुर से एलएलबी की डिग्री हासिल की और 1970-71 में राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ एपेक्स बॉडी के सदस्य रहे। साथ ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संयोजक एवं उपाध्यक्ष तथा राजस्थान युवा संघ व अखिल भारतीय संयोजक मंडल के अध्यक्ष भी रहे। विद्यालय जीवन से महाविद्यालय जीवन तक तिवाड़ी ने कई महत्वपूर्ण दायित्वों एवं पदों का निर्वहन किया। देश में 1975 के दौरान लगे आपातकाल ने तिवाड़ी को पूरी तरह राजनीतिक रण में उतार दिया। उन्होंने जमकर जनविरोधी नीतियों का विरोध किया। परिणामतः इन्हें जेल में डाल दिया गया और भरपूर यातनाएं दी गईं। इसके विरोध में जयप्रकाश नारायण जैसे जननायकों ने अनशन किया। यहीं से घनश्याम तिवाड़ी(Ghanshyam Tiwari) का जीवन बदल गया और वे पूरी तरह से सामाजिक-राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय हो गए।

पार्टी विचारधारा

आरंभ से ही भारतीय जनता पार्टी मजबूत, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत बनाने के लिए प्रतिबद्ध थी। दल की विचारधारा का प्रमुख आधार हमारी प्राचीन संस्कृति और भारतीय राष्ट्रवाद था। पार्टी पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित ‘एकात्म मानववाद’ के सिद्धांत से काफी हद तक प्रेरित है।

स्थापना के पहले ही दशक में भारतीय जनता पार्टी की गणना भारत के राजनैतिक क्षेत्र में एक बड़ी ताकत के रूप में होने लगी। 1989 में, अर्थात अपनी स्थापना के 9 साल में ही लोकसभा में पार्टी की संख्या 2 से 86 तक पहुंच गई। भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस विरोधी आंदोलन का केंद्र बिन्दु थी, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय मोर्चे का निर्माण हुआ। जिसने 1989-90 में भारत में शासन किया। यह उन्नति 1990 के दशक में भी जारी रही क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने 1990 के विधानसभा चुनावों में कई राज्यों में अपनी सरकारों का गठन किया था । 1991 में वह लोकसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी बनी, यह एक युवा पार्टी के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि थी।

1996 में श्री अटल बिहारी वाजपेई ने पूरी तरह गैर कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाले, देश के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। भारतीय जनता पार्टी ने 1998 और 1999 के चुनावों में लोगों का जनादेश प्राप्त किया और श्री वाजपेई के नेतृत्व में 1998 से 2004 तक छह साल के लिए देश में शासन किया।

आज भारतीय जनता पार्टी भारत के राजनैतिक परिदृश्य में एक बड़ी ताकत के रूप में सिद्ध हो चुकी है। वह केंद्र और कई राज्यों में सत्ता पर है।

हम एक मजबूत और गौरवशाली भारत के लिए सतत् कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

छात्र जीवन में दायित्व एवं पद

  • महामंत्री, श्री कल्याण कॉलेज, सीकर
  • सदस्य, अपेक्स बॉडी, राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ
  • संयोजक एवं उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
  • अध्यक्ष, राजस्थान युवा संघ एवं अखिल भारतीय संयोजक मंडल

विधानसभा में जनप्रतिनिधि-विधायक के रूप में

  • 1980 से 1985 तक प्रथम बार विधायक, विधानसभा क्षेत्र सीकर
  • 1985 से 1989 तक पुन: विधानसभा क्षेत्र सीकर से विधायक
  • 1993 से 1998 तक विधानसभा क्षेत्र, चौमूं से विधायक
  • 2003 से 2008 तक विधानसभा क्षेत्र, सांगानेर से विधायक
  • 2008 से 2013 तक विधानसभा क्षेत्र, सांगानेर से विधायक
  • 2013 से वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र, सांगानेर से विधायक

मंत्रित्वकाल

  • 02 जुलाई, 1998 से 30 नवम्बर, 1998 तक श्री भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व वाली सरकार में ऊर्जा मंत्री
  • 08 दिसम्बर, 2003 से 2007 तक श्रीमती वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली सरकार में प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, विधि एवं न्याय, संसदीय मामले, भाषाई अल्पसंख्यक, पुस्तकालय एवं भाषा मंत्री तथा दिसम्बर, 2007 से वर्ष 2008 तक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, विधि एवं न्याय मंत्री

पार्टी संबद्धता

  • 1981 में भाजपा, जिला सीकर के 6 वर्ष तक अध्यक्ष
  • 1991 में भाजपा, राजस्थान प्रदेश के महामंत्री
  • 1989 से 2003 तक भाजपा, राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष
  • 1992 से 1994 तक भाजपा राष्ट्रीय परिषद के सदस्य
  • 1992 से 1994 तक भाजपा, राजस्थान के प्रवक्ता
  • 1992 से 1994 तक चुनाव समिति, भाजपा, राजस्थान के सदस्य
  • 2000 से राष्ट्रीय कार्यकारिणी, भाजपा के सदस्य
  • 2008 में चुनाव घोषणा-पत्र समिति, भाजपा, राजस्थान के अध्यक्ष